शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

इंद्रेश प्रकरण की कवरेज .....



गतांक से आगे....
10 नवंबर के धरने की सबसे जोरदार कवरेज पंजाब केसरी ने की। पहले पेज पर संघ प्रमुख की तसवीर समेत दो तसवीरों के साथ दो कॉलम की खबर प्रकाशित की। भागवत ने दी गंभीर परिणामों की चेतावनी। यह खबर अंदर के पेज 11 पर भी फैलाई गई है। इसी दिन अखबार ने एक और खबर नई दिल्ली डेटलाइन से प्रकाशित की है। दिनेश शर्मा की दो कॉलम की इस खबर के साथ चार तस्वीरें प्रकाशित की गईं हैं। जिनमें दिल्ली के संघ के नेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता धरने पर बैठे दिख रहे हैं। दिनेश शर्मा की इस खबर का शीर्षक है – कांग्रेस अपने पाप छिपा रही है : संघ का पलटवार।

रविवार, 9 दिसंबर 2012

आरएसएस के प्रदर्शन की कवरेज



...गतांक से आगे 4....
दैनिक जागरण ने इस सिलसिले में 24 अक्टूबर को तीन खबरें प्रकाशित की हैं, जबकि 25 अक्टूबर और 31 अक्टूबर को एक-एक खबर छापी है। 24 अक्टूबर को पहले पृष्ठ पर दो कॉलम में प्रकाशित खबर का शीर्षक है – अजमेर धमाके की चार्जशीट में संघ के नेता का नाम। पृष्ठ तीन पर प्रकाशित दो खबरों का शीर्षक है – इंद्रेश कुमार के साथ संघ परिवार एकजुट और कांग्रेस का संघ पर हमला, बिहार में और आक्रामक होगी पार्टी। 25 अक्टूबर को अखबार ने लिखा है – एटीएस एक-दो दिन में इंद्रेश से करेगी पूछताछ। इसी दिन दूसरी खबर है – संघ की साख बचाने में जुटेगा अल्पसंख्यक मोर्चा। अखबार तीन नवंबर को लिखता है – मोदी फार्मूले से एटीएस पर हमला बोलेगा संघ। अहमदाबाद डेटलाइन की इस खबर को शत्रुघ्न शर्मा ने लिखा है। तीन कॉलम की इस खबर में आरएसएस के दस नवंबर के धरने को आधार बनाया गया है। दैनिक जागरण ने 8 नवंबर को ग्वालियर डेटलाइन से खबर प्रकाशित की- इंद्रेश के समर्थन में आए मुस्लिम संगठन।

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

ओमा शर्मा रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार से सम्मानित

(प्रेस विज्ञप्ति)
15वाँ  रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार राजधानी के गाँधी शांति प्रतिष्ठान में ओमा शर्मा को उनकी कहानी 'दुश्मन मेमना' के लिए प्रदान किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता की कथाकार-कलाकार प्रभु जोशी ने। मुख्य  अतिथि थे कवि -कथाकार कन्तिमोहन। निर्णायक और रंगकर्मी दिनेश खन्ना,'कथादेश' के संपादक हरिनारायण,कथाकार योगेन्द्र आहूजा और विमल कुमार ने कहा कि  एक रचनाकार की स्मृति में दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रेरणा का काम करता है। 

रविवार, 2 दिसंबर 2012

कैसे दिखे रिलायंस विरोधी खबर

(प्रथम प्रवक्ता पाक्षिक में प्रकाशित)

उमेश चतुर्वेदी
दुनिया के ज्यादातर देशों में संवैधानिक दर्जा हासिल ना होने के बावजूद अगर आम लोगों के उम्मीदों के चिराग अगर किसी संस्था से जलते हैं तो निश्चित तौर पर वह मीडिया ही है। लोकतंत्र के तीन अंगों से निराश और हताश लोगों को अगर इंसाफ की उम्मीद मीडिया से बना हुआ है तो इसकी बड़ी वजह यह है कि मीडिया को लोकतंत्र का पहरेदार माना जाता है। मीडिया के साथ पहरेदारी की यह खासियत उसके आचरण और नैतिकता पर आधारित होती है। लेकिन क्या आज के मीडिया से चौकस पहरेदारी की उम्मीद की जा सकती है? यह सवाल खास तौर पर उदारीकरण के दौर में ज्यादा पूछा जाने लगा है। समाज में बदलाव के पैरोकारों को भले ही यह निष्कर्ष नागवार गुजरे, लेकिन कड़वी हकीकत है कि हम आज के घोर चारित्रिक क्षरण के दौर में जी रहे हैं। इसका असर मीडिया पर पड़े बिना कैसे रह सकता है। अरविंद केजरीवाल के खुलासों के साथ मीडिया के रवैये को देखकर इसे आसानी से समझा जा सकता है। देश के लिए अपने रक्त का आखिरी कतरा तक बहा देने वाली इंदिरा गांधी के शहादत दिवस 31 अक्टूबर को पता नहीं रिलायंस और उससे जुड़े खुलासों के लिए अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर चुना या नहीं, लेकिन यह सच है कि उस दिन अरविंद केजरीवाल के खुलासों को लेकर मीडिया ने खास उत्साह नहीं दिखाया।

बुधवार, 28 नवंबर 2012

मीडिया में इंद्रेश प्रकरण की कवरेज 3...



अमर उजाला ने 24 अक्टूबर को तीन कॉलम की खबर प्रकाशित हो रही है – अजमेर ब्लास्ट में फंसे संघ नेता। सभी अखबारों ने संघ-बीजेपी की प्रतिक्रिया 24 अक्टूबर को ही दी है। लेकिन अमर उजाला को यह खबर देने का विचार अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को आया। इस दिन अखबार ने खबर दी है – अजमेर केस : भाजपा , संघ बिफरे। 27 अक्टूबर को अखबार ने संघ परिवार की खबर दी है। दो कॉलम की इस खबर का शीर्षक है – संघ पर शिकंजे से भगवा दल परेशान। इसके अगले दिन जयपुर डेटलाइन से खबर है – अजमेर ब्लास्ट में नया खुलासा, संघ नेता ने दिए थे निर्देश।  दो कॉलम की यह खबर राजस्थान एटीएस के हवाले से लिखी गई है। अमर उजाला ने आठ नवंबर को संघ के देशव्यापी धरने पर बैठने की खबर तीन कॉलम में छापी, जिसका शीर्षक था- भगवा ताप नापेंगे भागवत।

गुरुवार, 22 नवंबर 2012

मीडिया में इंद्रेश प्रकरण की कवरेज


(गतांक से आगे)....

 मुंबई से प्रकाशित डीएनए ने जयपुर डेटलाइन से 24 अक्टूबर को एक ही खबर प्रकाशित की है, जिसका शीर्षक है- आरएसएस ली़डर इन अजमेर ब्लास्ट चार्जशीट सीज कान्सिपरेसी। दो कॉलम की इस खबर को दूसरे पेज तक फैलाया गया है। इसके बाद डीएनए ने 3 नवंबर को खबर प्रकाशित की। तीन कॉलम की इस खबर का शीर्षक था – आरएसएस लान्च नेशनवाइड प्रोटेस्ट इन इंद्रेश सपोर्ट। इकोनॉमिक टाइम्स ने इसी दिन पूरे कॉलम में यह खबर प्रकाशित की है, जिसके साथ दो कॉलम का इंद्रेश कुमार और दूसरे नेताओं का फोटो भी है। इस खबर का शीर्षक है- एटीएस नेम्स आरएसएस लीडर इन अजमेर ब्लास्ट चार्जशीट। कोलकाता से प्रकाशित द टेलीग्राफ ने 24 अक्टूबर को छह कॉलम में खबर छापी है – ब्लास्ट क्लाउड ऑन आरएसएस आउटरीच मैन। इसके साथ ही अंदर के पेज पर राधिका रामशेषन की दिल्ली से चार्जशीट टाइमिंग लीव्स बीजेपी स्टन्ड शीर्षक से विश्लेषण भी प्रकाशित किया गया है।

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

ईस्ट इंडिया कंपनी की भाषा नीति और हिंदी
उमेश चतुर्वेदी
अगर भारतीयों को पूरी तरह से समझना और उन्हें कंपनी के शासन से संतुष्ट रखना है तो सबसे अच्छा उपाय यही हो सकता है कि सरकार के जिन जूनियर सिविल सेवकों को जनसंपर्क में रहकर प्रशासन की जिम्मेदारी संभालनी है, उन्हें हिंदुओं और मुसलमानों के रीति-रिवाजों, काम करने के तरीकों और धार्मिक मान्यताओं की जानकारी हो।
-          लॉर्ड वेलेजली
हिंदी को राजभाषा का उचित स्थान नहीं मिलने की जब भी चर्चा होती है, 1835 में लागू  की गई अंग्रेजी शिक्षा को जमकर कोसा जाता है। जिसे मैकाले की मिंट योजना के तहत लागू किया गया था। लेकिन इसके साढ़े तीन दशक पहले ही राजकाज में हिंदी या हिंदुस्तानी की जरूरत और अहमियत को भारत में कंपनी राज संभालने आए लॉर्ड वेलेजली ने समझ लिया था। उनकी यह समझ उनके इस बयान में साफ झलक रही है।