शनिवार, 22 दिसंबर 2012

माफी मांगें अजीत अंजुम ....

9 जाने-माने साहित्यकारों द्वारा जारी किया गया संयुक्त वक्तव्य
विभिन्न माध्यमों से पता चला है कि पिछले दिनों हिंदी के वयोवृद्ध लेखक राजेन्द्र यादव के साथ उनके घर जाकर अजित अंजुम नाम के व्यक्ति ने, जो टीवी का पत्रकार बतलाया जाता है, बदसलूकी और गाली-गलौज किया। यह अत्यंत शर्मनाक और खेदजनक घटना है। हो सकता है अजित अंजुम की राजेन्द्र यादव से कुछ शिकायतें हों। हम उस मामले में कोई भी पक्ष नहीं ले रहे हैं। लेखक के रूप में हमारा मानना सिर्फ यह है कि जब विवाद लेखन को लेकर हो और दो पढ़े-लिखे प्रबुद्ध लोगों के बीच हो तो उसे लोकतांत्रिक तरीके से हल किया जाना चाहिए। हम इस तरह के व्यवहार की भर्त्सना करते हैं और अपेक्षा करते हैं कि अजित अंजुम अपने इस व्यवहार के लिए अफसोस प्रकट करेंगे।
नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह,अशोक वाजपेयी,आनंदस्वरूप वर्मा,मंगलेश डबराल, मैत्रेयी पुष्पा, पंकज बिष्ट, प्रेमपाल शर्मा,भारत भारद्वाज (बयान पर आधारित विज्ञप्ति)

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

भगवा आतंकवाद या मीडिया का पूर्वाग्रह 6



पिछले साल यह सर्वे आधारित रिसर्च इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के सहयोग से किया गया था। कतिपय कारणों से यह प्रकाशित नहीं हो पाया। इसे क्रमश: यहां स्थान दिया जा रहा है।)
गतांक से आगे...

जनसत्ता ने 12 नवंबर को सुदर्शन के बयान प्रकरण को लेकर तीन खबरें प्रकाशित कीं। अखबार ने पहली खबर दो कॉलम स्पेशल डिस्प्ले में प्रकाशित की। संसद का एक और दिन हंगामे की भेंट चढ़ा शीर्षक वाली इस स्टोरी को अंदर के पेज तक फैलाया गया है। इसी के साथ बीजेपी और संघ की प्रतिक्रिया वाली एक कॉलम की स्टोरी भी अखबार ने प्रकाशित की है। इस खबर का शीर्षक है सुदर्शन के बयान से संघ और भाजपा ने पल्ला झाड़ा। तीसरी खबर एक कॉलम में प्रकाशित की गई, हालांकि इसे भी अंदर के पन्ने तक डिस्प्ले किया गया है। जिसका शीर्षक था सुदर्शन की अनर्गल बातें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं द्विवेदी। नवभारत टाइम्स ने इस सिलसिले में एक ही खबर प्रकाशित की सुदर्शन के कमेंट पर दिल्ली में भी उबाल, भड़के कांग्रेसी। दो कॉलम की इस खबर के साथ अखबर ने संघ मुख्यालय पर युवा कांग्रेसियों के आक्रामक प्रदर्शन की तीन कॉलम खबर प्रकाशित करके उसका डिस्प्ले बढ़ाया है।